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mahabharat 13.10.33: ऋषि ने अपना पितृकर्म विधिपूर्वक पूरा करके शूद्र से विदा ली और शूद्र धर्ममार्ग में स्थित हो गया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.10.33 
ऋषिणा पितृकार्ये च स च धर्मपथे स्थित:।
पितृकार्ये कृते चापि विसृष्ट: स जगाम ह॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि ने अपना पितृकर्म विधिपूर्वक पूरा करके शूद्र से विदा ली और शूद्र धर्ममार्ग में स्थित हो गया ॥33॥
 
After the Rishi completed his ancestral work duly, the Rishi took leave from the Shudra and the Shudra became established in the path of religion. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)