श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.10.3 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि शृणु राजन् यथाक्रमम्।
ऋषीणां वदतां पूर्वं श्रुतमासीत् यथा पुरा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन्! इस विषय को मैं तुमसे उसी क्रम से कहूँगा, जैसा मैंने पूर्वकाल में ऋषियों से सुना है, तुम सावधान होकर सुनो॥3॥
 
Bhishmaji said – King! I will tell you about this matter in the same order as I have heard from the sages in the past, you listen carefully. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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