Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.10.22-23: वे चित्तवृत्ति का निरोध करते थे, फलों पर जीवन निर्वाह करते थे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखते थे। प्रतिदिन अपने यहाँ आने वाले अतिथियों का सत्कार वे अपने यहाँ उपलब्ध भोजन और फलों से करते थे। इस प्रकार उस शूद्र मुनि का बहुत समय व्यतीत हो गया। | mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संकल्पनियमोपेत: फलाहारो जितेन्द्रिय:।
नित्यं संनिहिताभिस्तु ओषधीभि: फलैस्तथा॥ २२॥
अतिथीन् पूजयामास यथावत् समुपागतान्।
एवं हि सुमहान् कालो व्यत्यक्रामत तस्य वै॥ २३॥
अनुवाद
वे चित्तवृत्ति का निरोध करते थे, फलों पर जीवन निर्वाह करते थे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखते थे। प्रतिदिन अपने यहाँ आने वाले अतिथियों का सत्कार वे अपने यहाँ उपलब्ध भोजन और फलों से करते थे। इस प्रकार उस शूद्र मुनि का बहुत समय व्यतीत हो गया।
He used to control his mental thoughts (Chittvrittiya ka Nirodh) and lived on fruits and kept his senses under control. He used to treat the guests who came to him daily with the food and fruits that were available at his place. A lot of time passed for that Shudra Muni in this manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥