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mahabharat 13.10.10: भारतभूषण! वहाँ सर्वत्र वेदों के अध्ययन की ध्वनि गूंजती रहती है। उस आश्रम में अनेक वालखिल्य और तपस्वी आते हैं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.10 
तपोऽध्ययनघोषैश्च नादितं भरतर्षभ।
वालखिल्यैश्च बहुभिर्यतिभिश्च निषेवितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! वहाँ सर्वत्र वेदों के अध्ययन की ध्वनि गूंजती रहती है। उस आश्रम में अनेक वालखिल्य और तपस्वी आते हैं॥10॥
 
Bharatbhushan! The sound of the study of Vedas resounds everywhere there. Many Valakhilyas and ascetics visit that ashram.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)