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mahabharat 12.94.6: बुद्धिमान राजा को चाहिए कि वह दूसरे का राज्य और धन तभी हड़पने का प्रयत्न करे जब वह अपनी शक्ति प्रदर्शित करने का उपयुक्त अवसर समझे ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.94.6 
प्रतापकालमधिकं यदा मन्येत चात्मन:।
तदा लिप्सेत मेधावी परभूमिधनान्युत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राजा को चाहिए कि वह दूसरे का राज्य और धन तभी हड़पने का प्रयत्न करे जब वह अपनी शक्ति प्रदर्शित करने का उपयुक्त अवसर समझे ॥6॥
 
A wise king should try to take over another's kingdom and wealth only when he considers it to be an opportune moment to display his power. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)