| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव » श्लोक 3 |
|
| | | | श्लोक 12.94.3  | यस्य स्फीतो जनपद: सम्पन्न: प्रियराजक:।
संतुष्टपुष्टसचिवो दृढमूल: स पार्थिव:॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | जिसका देश समृद्ध, धन-धान्य से युक्त, राजा को प्रिय प्रजा से युक्त तथा योग्य मन्त्रियों से सुशोभित हो, उस राजा को दृढ़ जड़ वाला समझना चाहिए ॥3॥ | | | | The king whose country is prosperous, rich in wealth, full of people who are dear to the king and adorned with able-bodied ministers should be considered to have strong roots. ॥ 3॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|