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mahabharat 12.91.59: भीष्म कहते हैं - भरतपुत्र! उथथय के ऐसा उपदेश देने पर मान्धाता ने निःसंकोच होकर उनकी आज्ञा का पालन किया और सम्पूर्ण पृथ्वी पर एकछत्र राज्य प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.91.59 
भीष्म उवाच
स एवमुक्तो मान्धाता तेनोतथ्येन भारत।
कृतवानविशङ्कश्च एक: प्राप च मेदिनीम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरतपुत्र! उथथय के ऐसा उपदेश देने पर मान्धाता ने निःसंकोच होकर उनकी आज्ञा का पालन किया और सम्पूर्ण पृथ्वी पर एकछत्र राज्य प्राप्त किया।
 
Bhishma says - Son of Bharat! After Utthaya gave such advice, Mandhata obeyed his orders without any doubt and attained sole rule over the entire earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)