Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.91.31: जब राजा उसे उपयुक्त विभाग सौंपकर स्वयं उसका उपयोग करता है, अपने मंत्रियों का अनादर नहीं करता तथा दुष्ट मनुष्य या अपने बल के अभिमान से युक्त शत्रु का वध करता है, तब उसके सब कर्म राजा के कर्तव्य कहलाते हैं ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संविभज्य यदा भुङ्क्ते नामात्यानवमन्यते।
निहन्ति बलिनं दृप्तं स राज्ञो धर्म उच्यते॥ ३१॥
अनुवाद
जब राजा उसे उपयुक्त विभाग सौंपकर स्वयं उसका उपयोग करता है, अपने मंत्रियों का अनादर नहीं करता तथा दुष्ट मनुष्य या अपने बल के अभिमान से युक्त शत्रु का वध करता है, तब उसके सब कर्म राजा के कर्तव्य कहलाते हैं ॥31॥
When the king assigns him an appropriate department and uses it himself, does not disrespect his ministers and kills an evil man or an enemy who is full of pride of his power, then all his actions are known as the duty of a king. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥