Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.91.3: इसी प्रकार श्रेष्ठ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और चतुर्थ वर्ण शूद्र आदि लोग यदि अपने-अपने पृथक्-पृथक् कर्तव्यों को जानते हुए भी उनमें तत्पर नहीं रहते, तो उनका होना या न होना एक ही बात है। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.91.3 
एवमेतद् द्विजेन्द्राणां क्षत्रियाणां विशां तथा।
शूद्रश्चतुर्थो वर्णानां नानाकर्मस्ववस्थित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार श्रेष्ठ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और चतुर्थ वर्ण शूद्र आदि लोग यदि अपने-अपने पृथक्-पृथक् कर्तव्यों को जानते हुए भी उनमें तत्पर नहीं रहते, तो उनका होना या न होना एक ही बात है। ॥3॥
 
Similarly, if the superior Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and the people belonging to the fourth caste, the Shudra, know their separate duties but do not remain engaged in them, then their existence or non-existence is the same. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)