श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.91.29 
यश्चामात्यान् मानयित्वा यथार्थं
मन्त्रे च युद्धे च नृपो नियुञ्‍ज्‍यात्।
विवर्धते तस्य राष्ट्रं नृपस्य
भुङ्‍क्ते महीं चाप्यखिलां चिराय॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपने मन्त्रियों का सच्चा आदर करता है और उन्हें मंत्रणा या युद्ध के लिए नियुक्त करता है, उसका राज्य दिन-प्रतिदिन बढ़ता है और वह दीर्घकाल तक सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन भोगता है ॥29॥
 
The king who truly respects his ministers and employs them for counsel or war, his kingdom grows day by day and he enjoys the rule of the entire earth for a long time. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)