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mahabharat 12.91.2: यदि धोबी कपड़ों से मैल निकालना नहीं जानता अथवा रंगे हुए कपड़ों को धोकर स्वच्छ और उज्ज्वल बनाने की कला नहीं जानता, तो उसका होना या न होना एक ही बात है।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.91.2 
यो न जानाति हर्तुं वा वस्त्राणां रजको मलम्।
रक्तानां वा शोधयितुं यथा नास्ति तथैव स:॥ २॥
 
 
अनुवाद
यदि धोबी कपड़ों से मैल निकालना नहीं जानता अथवा रंगे हुए कपड़ों को धोकर स्वच्छ और उज्ज्वल बनाने की कला नहीं जानता, तो उसका होना या न होना एक ही बात है।॥2॥
 
If a washerman does not know how to remove dirt from clothes or does not know the art of washing dyed clothes to make them clean and bright, then his existence or non-existence is the same.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)