श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.90.11 
देवा: पूजां न जानन्ति न स्वधां पितरस्तदा।
न पूज्यन्ते ह्यतिथयो यदा पापो न वार्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब पाप नहीं रुकते, तब देवता पूजा नहीं जानते, पितरों को स्वधा (श्राद्ध) नहीं मिलता और अतिथियों का कहीं भी पूजन नहीं होता ॥11॥
 
When sins are not stopped, the gods do not know worship, the ancestors do not experience Swadha (Shraddha) and the guests are not worshipped anywhere. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)