श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.88.3 
यथा तासां च मन्येत श्रेय आत्मन एव च।
तथा कर्माणि सर्वाणि राजा राष्ट्रेषु वर्तयेत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह अपने राष्ट्र में ऐसे सब कर्मों का इस प्रकार प्रचार करे कि उन्हें करने से प्रजा का तथा अपना भी कल्याण समझ में आए ॥3॥
 
The king should propagate all such deeds in his nation in a way that by doing them one can understand the welfare of his subjects as well as himself. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)