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mahabharat 12.88.26: महाराज! जो राजकर्मचारी उचित मात्रा से अधिक कर वसूलते हैं या वसूल करवाते हैं, वे आपके दंड के पात्र हैं। अन्य अधिकारी आकर उन्हें उचित दान या कर वसूलने का प्रशिक्षण दें॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.88.26 
दण्डॺास्ते च महाराज धनादानप्रयोजका:।
प्रयोगं कारयेयुस्तान् यथाबलिकरांस्तथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो राजकर्मचारी उचित मात्रा से अधिक कर वसूलते हैं या वसूल करवाते हैं, वे आपके दंड के पात्र हैं। अन्य अधिकारी आकर उन्हें उचित दान या कर वसूलने का प्रशिक्षण दें॥ 26॥
 
Maharaj! Those government officials who collect or get taxes collected in excess of the proper amount are worthy of being punished by you. Other officials should come and train them to collect the correct gifts or taxes.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)