श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.88.23 
आपद्येव तु याचन्ते येषां नास्ति परिग्रह:।
दातव्यं धर्मतस्तेभ्यस्त्वनुक्रोशाद् भयान्न तु॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जिनके पास कुछ नहीं है, वे यदि विपत्ति के समय उनसे कुछ मांगें, तो उन्हें दया और कर्तव्य समझकर ही देना चाहिए, न कि भय या दबाव से ॥23॥
 
If people, who do not possess anything, ask for it in times of distress, they should give it to them out of compassion and as a matter of duty, and not out of fear or pressure. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)