श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.88.22 
मद्यमांसपरस्वानि तथा दारा धनानि च।
आहरेद् रागवशगस्तथा शास्त्रं प्रदर्शयेत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मोह के वश होकर मनुष्य मांस खाता है, मदिरा पीता है, दूसरों का धन और स्त्री हरण करता है। वह दूसरों को भी ऐसा ही करने का उपदेश देता है ॥22॥
 
Under the influence of attachment, a man eats meat, drinks alcohol, abducts other's wealth and wife. He also preaches to others to do the same. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)