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mahabharat 12.88.14-15: शराब की दुकानें खोलने वाले, वेश्यावृत्ति करने वाले, वेश्याओं के दलाल, जुआरी तथा ऐसे बुरे व्यवसायों में लगे हुए सभी लोग सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए हानिकारक हैं; अतः उन सबको दण्डित करके वश में रखना चाहिए। यदि वे राज्य में रहें, तो कल्याण के मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए बड़ी बाधाएँ उत्पन्न करते हैं॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  12.88.14-15 
पानागारनिवेशाश्च वेश्या: प्रापणिकास्तथा।
कुशीलवा: सकितवा ये चान्ये केचिदीदृशा:॥ १४॥
नियम्या: सर्व एवैते ये राष्ट्रस्योपघातका:।
एते राष्ट्रेऽभितिष्ठन्तो बाधन्ते भद्रिका: प्रजा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शराब की दुकानें खोलने वाले, वेश्यावृत्ति करने वाले, वेश्याओं के दलाल, जुआरी तथा ऐसे बुरे व्यवसायों में लगे हुए सभी लोग सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए हानिकारक हैं; अतः उन सबको दण्डित करके वश में रखना चाहिए। यदि वे राज्य में रहें, तो कल्याण के मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए बड़ी बाधाएँ उत्पन्न करते हैं॥14-15॥
 
Those who open liquor shops, prostitutes, prostitutes' brokers, gamblers and all those who are involved in such bad professions are harmful to the entire nation; therefore, all of them should be punished and kept under control. If they remain in the state, they cause great obstacles to the people walking on the path of welfare.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)