| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 87: राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय » श्लोक 37 |
|
| | | | श्लोक 12.87.37  | सान्त्वनं रक्षणं दानमवस्था चाप्यभीक्ष्णश:।
गोमिनां पार्थ कर्तव्य: संविभाग: प्रियाणि च॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | हे कुन्तीपुत्र! वैश्यों को सान्त्वना दो, उनकी रक्षा करो, उनकी आर्थिक सहायता करो, उनकी स्थिति को बार-बार सुदृढ़ करने का प्रयत्न करो, उन्हें आवश्यक वस्तुएँ दो और सदैव उनके प्रिय कार्य करो ॥ 37॥ | | | | O son of Kunti! Console the Vaishyas, protect them, help them financially, repeatedly try to strengthen their position, offer them essential goods and always do things that are dear to them. ॥ 37॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|