श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 87: राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.87.31 
कलत्रमादित: कृत्वा सर्वं वो विनशेदिति।
अपि चेत् पुत्रदारार्थमर्थसंचय इष्यते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के आक्रमण करने पर सबसे पहले तुम्हारी स्त्रियाँ ही संकट में पड़ेंगी। उनके साथ तुम्हारा सारा धन भी नष्ट हो जाएगा। धन का संचय केवल पत्नी और पुत्रों की रक्षा के लिए ही आवश्यक है॥31॥
 
‘When the enemies attack, your women will be the first to be in trouble. Along with them, all your wealth will be destroyed. Accumulation of wealth is necessary only for the protection of wife and sons.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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