भीष्म उवाच
राष्ट्रगुप्तिं च ते सम्यग् राष्ट्रस्यैव तु संग्रहम्।
हन्त सर्वं प्रवक्ष्यामि तत्त्वमेकमना: शृणु॥ २॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले- राजन्! अब मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ तुम्हें राष्ट्र की रक्षा और वृद्धि का सम्पूर्ण रहस्य बताता हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो।
Bhishmaji said- King! Now I am telling you with great pleasure the whole secret of protecting and increasing the nation. Listen with full concentration.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥