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mahabharat 12.86.24: गरीब, अनाथ, वृद्ध और विधवा स्त्रियों के कल्याण और जीविका की सदैव व्यवस्था करो ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.86.24 
कृपणानाथवृद्धानां विधवानां च योषिताम्।
योगक्षेमं च वृत्तिं च नित्यमेव प्रकल्पयेत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
गरीब, अनाथ, वृद्ध और विधवा स्त्रियों के कल्याण और जीविका की सदैव व्यवस्था करो ॥24॥
 
Always make arrangements for the welfare and livelihood of poor, orphan, old and widowed women. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)