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mahabharat 12.86.20: राजा को स्वयं गुप्तचरों से मिलना चाहिए, गुप्त परामर्श लेना चाहिए, कोष का निरीक्षण करना चाहिए और विशेष रूप से अपराधियों को दण्ड देना चाहिए; क्योंकि सारा राज्य इन्हीं पर निर्भर है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.86.20 
चरान्मन्त्रं च कोशं च दण्डं चैव विशेषत:।
अनुतिष्ठेत् स्वयं राजा सर्वं ह्यत्र प्रतिष्ठितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा को स्वयं गुप्तचरों से मिलना चाहिए, गुप्त परामर्श लेना चाहिए, कोष का निरीक्षण करना चाहिए और विशेष रूप से अपराधियों को दण्ड देना चाहिए; क्योंकि सारा राज्य इन्हीं पर निर्भर है ॥20॥
 
The king himself should meet the spies, take secret advice, inspect the treasury and especially punish the criminals; because the whole kingdom depends on these. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)