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mahabharat 12.86.18: राजा को चाहिए कि वह धार्मिक लोगों का आदर करे और पापियों को दण्ड दे। उसे चाहिए कि वह सभी वर्णों को उनके अपने-अपने कार्यों में तत्परतापूर्वक लगाए। 18॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.86.18 
पूजयेद् धार्मिकान् राजा निगृह्णीयादधार्मिकान्।
नियुञ्‍ज्‍याच्च प्रयत्नेन सर्ववर्णान् स्वकर्मसु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह धार्मिक लोगों का आदर करे और पापियों को दण्ड दे। उसे चाहिए कि वह सभी वर्णों को उनके अपने-अपने कार्यों में तत्परतापूर्वक लगाए। 18॥
 
The king should honor religious people and punish sinners. He should engage all the varnas diligently in their respective activities. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)