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mahabharat 12.86.15: जलाशय (तालाब, झील आदि), कुएँ, प्रचुर जल से भरे हुए बड़े-बड़े तालाब और दूध देने वाले वृक्ष - राजा को इन सबकी सदैव रक्षा करनी चाहिए ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.86.15 
आशयाश्चोदपानाश्च प्रभूतसलिलाकरा:।
निरोद्धव्या: सदा राज्ञा क्षीरिणश्च महीरुहा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जलाशय (तालाब, झील आदि), कुएँ, प्रचुर जल से भरे हुए बड़े-बड़े तालाब और दूध देने वाले वृक्ष - राजा को इन सबकी सदैव रक्षा करनी चाहिए ॥15॥
 
Water reservoirs (ponds, lakes etc.), wells, large ponds filled with abundant water and milk-yielding trees – the king must always protect all of these. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)