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mahabharat 12.86.11: राजा को चाहिए कि वह उस नगर में कोष, सेना, मित्रों की संख्या और आचरण को बढ़ाए तथा नगर और बाहर के गांवों में सब प्रकार के दोषों को दूर करे ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.86.11 
तत्र कोशं बलं मित्रं व्यवहारं च वर्धयेत्।
पुरे जनपदे चैव सर्वदोषान् निवर्तयेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह उस नगर में कोष, सेना, मित्रों की संख्या और आचरण को बढ़ाए तथा नगर और बाहर के गांवों में सब प्रकार के दोषों को दूर करे ॥11॥
 
The king should increase the treasury, army, number of friends and behaviour in that city. He should remove all kinds of defects in the city and the villages outside. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)