श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.83.49 
नास्य च्छिद्रं पर: पश्येच्छिद्रेषु परमन्वियात्।
गूहेत् कूर्म इवाङ्गानि रक्षेद् विवरमात्मन:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
राजा को यह प्रयत्न करना चाहिए कि उसकी दुर्बलताएँ शत्रु को न दिखें; परन्तु उसे शत्रु की समस्त दुर्बलताओं का ज्ञान होना चाहिए। जैसे कछुआ अपने सभी अंगों को छिपाकर रखता है, वैसे ही राजा को भी अपने गुप्त विचारों और दुर्बलताओं को छिपाकर रखना चाहिए। 49.
 
The king should try to ensure that his weaknesses are not seen by the enemy; but he should know all the weaknesses of the enemy. Just like a tortoise keeps all its limbs hidden, the king should also keep his secret thoughts and weaknesses hidden. 49.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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