श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.83.30 
मन्त्रिण्यननुरक्ते तु विश्वासो नोपपद्यते।
तस्मादननुरक्ताय नैव मन्त्रं प्रकाशयेत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो मंत्री राजा से स्नेह नहीं रखता, उस पर विश्वास करना उचित नहीं है; इसलिए जो मंत्री राजा से स्नेह नहीं रखता, उसके समक्ष अपने गुप्त विचार प्रकट नहीं करने चाहिए ॥30॥
 
It is not right to trust a minister who has no affection for the king; hence one should not reveal his secret thoughts to a minister who has no affection for the king. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)