श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.83.16 
कुलीन: कुलसम्पन्नस्तितिक्षुर्दक्ष आत्मवान्।
शूर: कृतज्ञ: सत्यश्च श्रेयस: पार्थ लक्षणम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! उत्तम कुल में जन्म लेना, सदैव श्रेष्ठ कुल के सम्पर्क में रहना, सहनशीलता, कार्यकुशलता, सहृदयता, वीरता, कृतज्ञता और सत्य बोलना - ये महापुरुष के लक्षण हैं। 16॥
 
Kuntinandan! Being born in a good family, always being in contact with the best family, tolerance, efficiency, good-heartedness, bravery, gratitude and speaking the truth - these are the characteristics of a great man. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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