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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.82.70 
हितं तद्वचनं श्रुत्वा कौसल्योऽप्यजयन्महीम्।
तथा च कृतवान् राजा यथोक्तं तेन भारत॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! कोसल के राजा ने भी पुरोहित के हितकारी वचन सुने और जैसा कहा वैसा ही किया। इससे उसने सम्पूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त कर ली।
 
Bharat! The king of Kosala also heard the beneficial words of the priest and did as he said. With this he conquered the whole world. 70.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अमात्यपरीक्षायां कालकवृक्षीयोपाख्याने द्वॺशीतितमोऽध्याय:॥ ८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें मन्त्रियोंकी परीक्षाके प्रसङ्गमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यानविषयक बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)