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श्लोक  12.82.67 
उभे दृष्ट्वा दु:खसुखे राज्यं प्राप्य यदृच्छया।
राज्येनामात्यसंस्थेन कथं राजन् प्रमाद्यसि॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपने सुख-दुःख दोनों भोग लिए हैं। ईश्वर की इच्छा से आपको यह राज्य प्राप्त हुआ है, फिर भी आप इसे मंत्रियों पर ही छोड़कर क्यों भूल कर रहे हैं?
 
Maharaj! You have experienced both happiness and sorrow. You have received this kingdom by the will of God, yet why are you making a mistake by leaving it to the ministers alone?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)