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mahabharat 12.82.63: महाराज! हम ब्राह्मण हैं। हमारा दण्ड भी बहुत हल्का है। हम स्वभाव से दयालु हैं; इसलिए हम आपका, दूसरों का तथा अपना भी भला चाहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.82.63 
वयं तु ब्राह्मणा नाम मृदुदण्डा: कृपालव:।
स्वस्ति चेच्छाम भवत: परेषां च यथाऽऽत्मन:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हम ब्राह्मण हैं। हमारा दण्ड भी बहुत हल्का है। हम स्वभाव से दयालु हैं; इसलिए हम आपका, दूसरों का तथा अपना भी भला चाहते हैं।
 
Maharaj! We are Brahmins. Our punishment is also very mild. We are kind by nature; hence we wish well for you and others as well as for ourselves. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)