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mahabharat 12.82.62: हे मनुष्यों के स्वामी! जब बहुत से लोगों पर एक ही बात का आरोप लगाया जाता है, तब वे सब मिलकर बड़े-बड़े काँटों को भी कुचल देते हैं। अतः यह गुप्त विचार दूसरों पर प्रकट न हो, इसके लिए मैं तुम्हें सलाह दे रहा हूँ कि तुम अपने विरोधियों को एक-एक करके मार डालो ॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.82.62 
एकदोषा हि बहवो मृद्नीयुरपि कण्टकान्।
मन्त्रभेदभयाद् राजंस्तस्मादेतद् ब्रवीमि ते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब बहुत से लोगों पर एक ही बात का आरोप लगाया जाता है, तब वे सब मिलकर बड़े-बड़े काँटों को भी कुचल देते हैं। अतः यह गुप्त विचार दूसरों पर प्रकट न हो, इसके लिए मैं तुम्हें सलाह दे रहा हूँ कि तुम अपने विरोधियों को एक-एक करके मार डालो ॥ 62॥
 
O Lord of men! When many people are accused of the same thing, they all unite and in that condition they crush even the biggest thorns. Therefore, to ensure that this secret thought is not revealed to others, I am advising you to kill your opponents one by one. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)