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mahabharat 12.82.60: हे प्रभु! मैं राजदण्ड को किस प्रकार भलीभाँति धारण कर सकूँ और मुझसे केवल शुभ कर्म ही हों, इस पर विचार कीजिए। फिर मुझे कल्याण के मार्ग पर लगाइए ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.82.60 
यथा स्यात् सुधृतो दण्डो यथा च सुकृतं कृतम्।
तथा समीक्ष्य भगवन् श्रेयसे विनियुङ्क्ष्व माम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं राजदण्ड को किस प्रकार भलीभाँति धारण कर सकूँ और मुझसे केवल शुभ कर्म ही हों, इस पर विचार कीजिए। फिर मुझे कल्याण के मार्ग पर लगाइए ॥60॥
 
O Lord! Think about the way in which I may hold the royal rod well and only good deeds may be done by me. Then put me on the path of welfare. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)