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mahabharat 12.82.59: हे ब्रह्मन्! जो लोग तुम्हें मेरे साथ नहीं रखना चाहते, वे स्वयं मेरे घर में नहीं रह सकेंगे। अब तुम स्वयं ही विचार करो और समझो कि इन विरोधियों का दमन करने के लिए क्या आवश्यक कर्तव्य है ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.82.59 
ये त्वां ब्राह्मण नेच्छन्ति ते न वत्स्यन्ति मे गृहे।
भवतैव हि तज्ज्ञेयं यत्तदेषामनन्तरम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! जो लोग तुम्हें मेरे साथ नहीं रखना चाहते, वे स्वयं मेरे घर में नहीं रह सकेंगे। अब तुम स्वयं ही विचार करो और समझो कि इन विरोधियों का दमन करने के लिए क्या आवश्यक कर्तव्य है ॥59॥
 
O Brahman! Those who do not want you to stay with me will themselves not be able to stay in my house. Now you must think and understand for yourself what is the necessary duty to suppress these opponents. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)