Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.56: मैं ही आपका उपकार करनेवाला हूँ, परन्तु इन मन्त्रियों ने मुझमें बड़ा दोष पाया है और इसीलिए मुझसे द्वेष करने लगे हैं। इसके अतिरिक्त उनके क्रोध का और कोई कारण नहीं है। मुझे अपने कथन की सत्यता में कोई संदेह नहीं है ॥ 56॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भवतोऽर्थकृदित्येवं मयि दोषो हि तै: कृत:।
विद्यते कारणं नान्यदिति मे नात्र संशय:॥ ५६॥
अनुवाद
मैं ही आपका उपकार करनेवाला हूँ, परन्तु इन मन्त्रियों ने मुझमें बड़ा दोष पाया है और इसीलिए मुझसे द्वेष करने लगे हैं। इसके अतिरिक्त उनके क्रोध का और कोई कारण नहीं है। मुझे अपने कथन की सत्यता में कोई संदेह नहीं है ॥ 56॥
I am the one who does good to you, but these ministers have found a big fault in me and that is why they have started hating me. There is no other reason for their anger except this. I have no doubt about the truth of my statement. ॥ 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥