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mahabharat 12.82.51: हे मनुष्यों के स्वामी! जिन लोगों को आपने मंत्री बनाया और जिनका आप अनुसरण करते थे, वे आपको धोखा दे रहे हैं और आपके ही हित का नाश करना चाहते हैं ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.82.51 
त्वया चैव कृता राजन् भवता परिपालिता:।
भवन्तमभिसंधाय जिघांसन्ति भवत्प्रियम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जिन लोगों को आपने मंत्री बनाया और जिनका आप अनुसरण करते थे, वे आपको धोखा दे रहे हैं और आपके ही हित का नाश करना चाहते हैं ॥ 51॥
 
O Lord of men! The people whom you appointed as your ministers and whom you followed, are deceiving you and want to destroy your own interests. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)