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mahabharat 12.82.47-48h: हे राजन! आप विषैले सर्पों से घिरे हुए कुएँ के समान हैं। आपकी स्थिति मीठे पानी की नदी के समान हो गई है, जिसके किनारों तक पहुँचना कठिन है, जिसके दोनों किनारे बहुत ऊँचे हैं और चारों ओर करील की झाड़ियाँ और बेंत की लताएँ फैली हुई हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  12.82.47-48h 
आशीविषै: परिवृत: कूपस्त्वमसि पार्थिव।
दुर्गतीर्था बृहत्कूला कारीरा वेत्रसंयुता॥ ४७॥
नदी मधुरपानीया यथा राजंस्तथा भवान्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! आप विषैले सर्पों से घिरे हुए कुएँ के समान हैं। आपकी स्थिति मीठे पानी की नदी के समान हो गई है, जिसके किनारों तक पहुँचना कठिन है, जिसके दोनों किनारे बहुत ऊँचे हैं और चारों ओर करील की झाड़ियाँ और बेंत की लताएँ फैली हुई हैं।
 
O King! You are like a well surrounded by poisonous snakes. Your condition has become like that of a sweet-water river, whose banks are difficult to reach, whose both banks are very high and there are Karil bushes and creepers of cane spreading all around. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)