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mahabharat 12.82.45: राजा! सीता नाम की एक नदी है जिसमें नावें भी डूब जाती हैं। इसी प्रकार यहाँ की राजनीति भी ऐसी ही है (इसमें मेरे जैसे सहायकों के डूबने की सम्भावना है)। मैं इसे ऐसा फाँसी समझता हूँ जो समस्त प्राणियों का नाश कर देगी॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.82.45 
सीता नाम नदी राजन् प्लवो यस्यां निमज्जति।
तथोपमामिमां मन्ये वागुरां सर्वघातिनीम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
राजा! सीता नाम की एक नदी है जिसमें नावें भी डूब जाती हैं। इसी प्रकार यहाँ की राजनीति भी ऐसी ही है (इसमें मेरे जैसे सहायकों के डूबने की सम्भावना है)। मैं इसे ऐसा फाँसी समझता हूँ जो समस्त प्राणियों का नाश कर देगी॥ 45॥
 
King! There is a river named Sita in which even boats drown. Similarly, politics here is also like this (there is a possibility of helpers like me drowning in it). I consider it to be a hanging which will destroy all living beings. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)