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mahabharat 12.82.38: मैं यहाँ किसी कामना से नहीं आया था, फिर भी मुझे धोखा देने के इच्छुक षडयंत्रकारियों ने मेरे कौवे को मारकर यमलोक पहुँचा दिया। हे राजन! मैंने तपस्या से प्राप्त दूरदर्शी दृष्टि से यह सब देखा है।   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.82.38 
छद्मकामैरकामस्य गमितो यमसादनम्।
दृष्टं ह्येतन्मया राजंस्तपोदीर्घेन चक्षुषा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मैं यहाँ किसी कामना से नहीं आया था, फिर भी मुझे धोखा देने के इच्छुक षडयंत्रकारियों ने मेरे कौवे को मारकर यमलोक पहुँचा दिया। हे राजन! मैंने तपस्या से प्राप्त दूरदर्शी दृष्टि से यह सब देखा है।
 
I had not come here with any desire, yet the conspirators who wanted to deceive me killed my crow and sent it to Yamaloka. O King! I have seen all this with the farsighted vision I have acquired through penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)