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mahabharat 12.82.34: परन्तु मैं इसके लिए तुम्हारी और तुम्हारे प्रेमियों की निंदा नहीं करता। मैं तो केवल इतना कहता हूँ कि तुम अपना भला-बुरा स्वयं पहचानो। प्रत्येक कार्य को अपनी आँखों से देखो। दूसरों की देख-रेख पर निर्भर मत रहो। ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.82.34 
न च मेऽत्र भवान् गर्ह्यो न चयेषां भवान् प्रिय:।
हिताहितांस्तु बुद्धॺेथा मा परोक्षमतिर्भवे:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं इसके लिए तुम्हारी और तुम्हारे प्रेमियों की निंदा नहीं करता। मैं तो केवल इतना कहता हूँ कि तुम अपना भला-बुरा स्वयं पहचानो। प्रत्येक कार्य को अपनी आँखों से देखो। दूसरों की देख-रेख पर निर्भर मत रहो। ॥34॥
 
But I do not condemn you and your lovers for this. I only say that you should recognize your own good and bad. See every action with your own eyes. Do not rely on the care of others. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)