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mahabharat 12.82.32: हे राजन! यमराज ने जो कहा है, वह ठीक ही है; फिर भी मैं आपकी महान आवश्यकता को बार-बार पूरा करूँगा॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.82.32 
इति राजन् यम: प्राह वर्तते च तथैव तत्।
अथ भूयांसमेवार्थं करिष्यामि पुन: पुन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यमराज ने जो कहा है, वह ठीक ही है; फिर भी मैं आपकी महान आवश्यकता को बार-बार पूरा करूँगा॥ 32॥
 
O King! What Yamaraja has said is correct as it is; nevertheless, I will repeatedly fulfil your great need. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)