Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.30: मनुष्य को सदैव सावधान रहना चाहिए कि उसके मुख से कोई बुरी बात न निकले, कोई बुरा काम न हो, तथा खड़े होते समय, किसी भी आसन में बैठते समय, चलते समय, हाव-भाव करते समय या शरीर के किसी भी अंग से कोई हरकत करते समय कोई अशिष्ट या अपमानजनक कार्य न हो ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को सदैव सावधान रहना चाहिए कि उसके मुख से कोई बुरी बात न निकले, कोई बुरा काम न हो, तथा खड़े होते समय, किसी भी आसन में बैठते समय, चलते समय, हाव-भाव करते समय या शरीर के किसी भी अंग से कोई हरकत करते समय कोई अशिष्ट या अपमानजनक कार्य न हो ॥30॥
One must always be cautious so that no bad words come out of one's mouth, no bad deed is done, and no impolite or disrespectful act is committed while standing, sitting in any posture, walking, making gestures or making any movement with any body part. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥