Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.27: यह असम्भव है कि जो लोग राजा के निकट रहते हैं, वे कभी कोई लापरवाही न करें, किन्तु जो अपना भला चाहता है, उसे जान-बूझकर उसके निकट कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। 27. | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैकान्तेन प्रमादो हि शक्य: कर्तुं महीपतौ।
न तु प्रमाद: कर्तव्य: कथंचिद् भूतिमिच्छता॥ २७॥
अनुवाद
यह असम्भव है कि जो लोग राजा के निकट रहते हैं, वे कभी कोई लापरवाही न करें, किन्तु जो अपना भला चाहता है, उसे जान-बूझकर उसके निकट कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। 27.
It is impossible that those who live near the King should never commit any negligence, but one who seeks his own good should not knowingly commit any negligence near him. 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥