Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.12-13: कोसलराज के सम्मुख उपस्थित होकर ऋषि ने कौवे के कथन का उल्लेख करते हुए उस सुन्दर वेशधारी मंत्री से कहा, "तुमने अमुक स्थान पर राजा का अमुक धन चुराया है। अमुक व्यक्ति यह जानते हैं और इसके साक्षी हैं।" हमारा यह कौआ कहता है, "तुमने राजकोष चुराया है; अतः तुम्हें तुरन्त अपना अपराध स्वीकार करना चाहिए।" ॥12-13॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स स्म कौसल्यमागम्य राजामात्यमलंकृतम्।
प्राह काकस्य वचनादमुत्रेदं त्वया कृतम्॥ १२॥
असौ चासौ च जानीते राजकोशस्त्वया हृत:।
एवमाख्याति काकोऽयं तच्छीघ्रमनुगम्यताम्॥ १३॥
अनुवाद
कोसलराज के सम्मुख उपस्थित होकर ऋषि ने कौवे के कथन का उल्लेख करते हुए उस सुन्दर वेशधारी मंत्री से कहा, "तुमने अमुक स्थान पर राजा का अमुक धन चुराया है। अमुक व्यक्ति यह जानते हैं और इसके साक्षी हैं।" हमारा यह कौआ कहता है, "तुमने राजकोष चुराया है; अतः तुम्हें तुरन्त अपना अपराध स्वीकार करना चाहिए।" ॥12-13॥
Appearing before the King of Kosal, the sage told the well-dressed minister, referring to the crow's statement, "You have stolen a certain amount of wealth belonging to the king at a certain place. Such and such persons know this and are witnesses to this." This crow of ours says, "You have stolen the royal treasury; therefore, you must confess your crime immediately." ॥12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥