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mahabharat 12.81.30: आप समस्त प्राणियों के गुरु हैं। आप भूत, वर्तमान और भविष्य के ज्ञाता हैं। आप जैसे महापुरुष की शरण में आकर सभी यादव सुखपूर्वक उन्नति करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.81.30 
त्वं गुरु: सर्वभूतानां जानीषे त्वं गतागतम्।
त्वामासाद्य यदुश्रेष्ठमेधन्ते यादवा: सुखम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
आप समस्त प्राणियों के गुरु हैं। आप भूत, वर्तमान और भविष्य के ज्ञाता हैं। आप जैसे महापुरुष की शरण में आकर सभी यादव सुखपूर्वक उन्नति करते हैं।
 
You are the Guru of all living beings. You know the past, the present and the future. All the Yadavas happily prosper by taking shelter of a great man like you.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि वासुदेवनारदसंवादो नामैकाशीतितमोऽध्याय:॥ ८१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें श्रीकृष्ण-नारदसंवाद नामक इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)