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mahabharat 12.80.31: क्योंकि वे सदैव एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हुए काम करते हैं और एक-दूसरे से सलाह लेकर धन प्राप्ति के विषय में विचार-विमर्श करते रहते हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.80.31 
एते कर्माणि कुर्वन्ति स्पर्धमाना मिथ: सदा।
अनुतिष्ठन्ति चैवार्थमाचक्षाणा: परस्परम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि वे सदैव एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हुए काम करते हैं और एक-दूसरे से सलाह लेकर धन प्राप्ति के विषय में विचार-विमर्श करते रहते हैं ॥31॥
 
Because they always work in competition with each other and keep discussing the issue of achieving wealth by taking advice from one another. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)