Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.80.2: अतः राजा की सहायता करने वाले सचिव (मंत्री) का स्वभाव और आचरण कैसा होना चाहिए? राजा को किस प्रकार के मंत्री पर विश्वास करना चाहिए और किस प्रकार के मंत्री पर नहीं?॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किंशील: किंसमाचारो राज्ञोऽथ सचिवो भवेत्।
कीदृशे विश्वसेद् राजा कीदृशे न च विश्वसेत्॥ २॥
अनुवाद
अतः राजा की सहायता करने वाले सचिव (मंत्री) का स्वभाव और आचरण कैसा होना चाहिए? राजा को किस प्रकार के मंत्री पर विश्वास करना चाहिए और किस प्रकार के मंत्री पर नहीं?॥2॥
So what should be the nature and conduct of the secretary (minister) who assists the king? What kind of minister should the king trust and what kind should he not trust?॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥