Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.80.13: जो व्यक्ति ऐसा मानता है (चाहे वह भाई, पड़ोसी या पुत्र ही क्यों न हो) कि ‘मेरे मरने के बाद अमुक व्यक्ति राजा बनेगा और यह सब धन ले लेगा’, उससे सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि विद्वान लोग उसे शत्रु मानते हैं॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो व्यक्ति ऐसा मानता है (चाहे वह भाई, पड़ोसी या पुत्र ही क्यों न हो) कि ‘मेरे मरने के बाद अमुक व्यक्ति राजा बनेगा और यह सब धन ले लेगा’, उससे सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि विद्वान लोग उसे शत्रु मानते हैं॥13॥
One should always be cautious of a person (even if he is a brother, a neighbor or a son) who believes that 'so and so will become the king after my death and take over all this wealth', because learned people consider him as an enemy.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥