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mahabharat 12.78.8: यदि भलीभाँति विचार करके पके हुए अन्न के बदले कच्चा अन्न दिया जाए, ऐसा विचार करके कि, ‘हम बना-बनाया रसोईघर ढूँढ़कर खा लेंगे। तुम यह कच्चा अन्न ले लो और पका लो।’ तो उसमें कोई पाप नहीं है। ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.78.8 
वयं सिद्धमशिष्यामो भवान् साधयतामिदम्।
एवं संवीक्ष्य निमयेन्नाधर्मोऽस्ति कथंचन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि भलीभाँति विचार करके पके हुए अन्न के बदले कच्चा अन्न दिया जाए, ऐसा विचार करके कि, ‘हम बना-बनाया रसोईघर ढूँढ़कर खा लेंगे। तुम यह कच्चा अन्न ले लो और पका लो।’ तो उसमें कोई पाप नहीं है। ॥8॥
 
If cooked food is exchanged for raw food after thinking well with the thought, 'We will find a ready-made kitchen and eat. You take this raw food and cook it.', then there is no sin in it. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)