Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.78.42-43: कुन्तीपुत्र! जिस प्रकार काठ का हाथी, चमड़े का मृग, किन्नर, बंजर खेत और वर्षा न करने वाला बादल, ये सब व्यर्थ हैं, उसी प्रकार अशिक्षित ब्राह्मण और रक्षा न करने वाला राजा भी सर्वथा व्यर्थ हैं। | mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा दारुमयो हस्ती यथा चर्ममयो मृग:।
यथा ह्यनर्थ: षण्ढो वा पार्थ क्षेत्रं यथोषरम्॥ ४२॥
एवं विप्रोऽनधीयानो राजा यश्च न रक्षिता।
मेघो न वर्षते यश्च सर्वथा ते निरर्थका:॥ ४३॥
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! जिस प्रकार काठ का हाथी, चमड़े का मृग, किन्नर, बंजर खेत और वर्षा न करने वाला बादल, ये सब व्यर्थ हैं, उसी प्रकार अशिक्षित ब्राह्मण और रक्षा न करने वाला राजा भी सर्वथा व्यर्थ हैं।
Kunti's son! Just as a wooden elephant, a leather deer, a eunuch, a barren field and a cloud that does not bring rain are all useless, in the same way an illiterate Brahmin and a king who does not protect are also completely useless.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥